लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कथित हाई-प्रोफाइल देह व्यापार नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। उज्बेकिस्तान की नागरिक लोला क्यूमोवा को लखनऊ पुलिस और एफआरआरओ की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, वह करीब एक साल से जांच एजेंसियों की नजर में थी।
क्लिनिक में एक पहचान पत्र बना गिरफ्तारी की वजह!
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अगस्त को लखनऊ के एक क्लिनिक में एक विदेशी महिला इलाज के लिए पहुंची थी। इस दौरान रेफरेंस के तौर पर लोला का भारतीय पहचान पत्र इस्तेमाल किया गया। क्लिनिक से सूचना मिलने के बाद एफआरआरओ और पुलिस ने कार्रवाई की और लोला को हिरासत में लिया। जांच में उसके वीजा और पासपोर्ट की स्थिति तथा कथित भारतीय पहचान पत्रों को लेकर भी पड़ताल की जा रही है।
विदेशी महिलाओं को लखनऊ लाने का आरोप !
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, लोला पर उज्बेकिस्तान और नेपाल से महिलाओं को अवैध तरीके से लखनऊ लाने और उन्हें कथित देह व्यापार के नेटवर्क में शामिल करने का आरोप है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
प्लास्टिक सर्जरी का एंगल भी जांच के घेरे में !
इस मामले में विदेशी महिलाओं के हुलिए में कथित बदलाव के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराए जाने का एंगल भी सामने आया है। हालांकि, इस मामले में संबंधित डॉक्टर ने अपनी भूमिका से जुड़े आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उनके पास इलाज के लिए आने वाली महिला को सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के तहत उपचार दिया गया था। इसलिए इस पहलू पर जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
2025 की कार्रवाई के बाद से थी फरार !
मामले की कड़ी जून 2025 की उस कार्रवाई से भी जुड़ती है, जब लखनऊ के एक अपार्टमेंट से दो विदेशी महिलाओं को पकड़े जाने के बाद कथित मानव तस्करी और देह व्यापार नेटवर्क की जांच शुरू हुई थी। इसके बाद से लोला के फरार रहने की बात सामने आई थी।
फर्जी दस्तावेज और दूसरे राज्यों तक नेटवर्क की जांच !
पुलिस अब कथित फर्जी भारतीय पहचान पत्रों, विदेशी नागरिकों के अवैध ठहरने और नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक संभावित विस्तार की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, लोला से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर !
फिलहाल मामले में कई गंभीर आरोप जांच के दायरे में हैं। पुलिस और संबंधित एजेंसियां कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और वित्तीय तथा डिजिटल कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने और अदालत में तथ्य सामने आने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।