खंडवा ने इस लक्ष्य को बड़े अंतर से पार कर लिया और लगभग 1.3 लाख संरचनाओं को पूरा किया, जो देश भर में सबसे अधिक है। इस शानदार प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने खंडवा को 2 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली है।
मध्यप्रदेश का खंडवा जिला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए खंडवा (ईस्ट निमाड़) ने ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के लिए मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में जिले के अधिकारियों को सम्मानित किया।

राष्ट्रीय स्तर पर खंडवा का जलवा
‘जल शक्ति मंत्रालय’ द्वारा संचालित ‘जल संचय–जन भागीदारी’ अभियान का उद्देश्य देश भर में जल संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट प्रयासों को बढ़ावा देना और जनता को इससे जोड़ना है। इस अभियान के तहत खंडवा जिले ने न सिर्फ बड़े पैमाने पर जल संचय संरचनाएँ विकसित कीं बल्कि स्थानीय समुदाय को भी योजना का सक्रिय भागीदार बनाया।
इन उल्लेखनीय प्रयासों के फलस्वरूप खंडवा को दक्षिण क्षेत्र की प्रथम श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ।
राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
राष्ट्रीय उपलब्धि की इस घोषणा के बाद विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिले के अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान किया।
सम्मान ग्रहण करने वालों में शामिल थे—
- रीषव गुप्ता — कलेक्टर, खंडवा
- नागार्जुन गौड़ा — मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत
राष्ट्रपति ने खंडवा की टीम की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण आज देश की प्रमुख ज़रूरत है और खंडवा ने जनभागीदारी के माध्यम से इसका उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।
समारोह में अन्य विजेताओं का भी सम्मान
इस अवसर पर देशभर से आए प्रतिभागियों और अधिकारीगणों के बीच छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार भी प्रदान किए गए। अलग-अलग श्रेणियों में जल संरक्षण, जल प्रबंधन, नवाचार, और जन-जागरूकता के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं, जिलों और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
‘जल संचय–जन भागीदारी’ अभियान में अनेक श्रेणियों के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर जल सुरक्षा की दिशा में किए जा रहे विविध प्रयासों को राष्ट्रीय मंच मिला।
खंडवा मॉडल क्यों बना सफल?
खंडवा जिले ने पिछले कुछ वर्षों में जल संकट को दूर करने के उद्देश्य से कई अभिनव परियोजनाएँ शुरू कीं। इन परियोजनाओं में प्रमुखधारी थी—
- वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन
- नालों और जलाशयों का गहरीकरण
- ग्रामीण समुदाय को जागरूक कर जल परियोजनाओं में शामिल करना
- कृषि आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा देना
- माइक्रो इरीगेशन और चेक डैम के विकास
इन पहलों की विशेषता यह रही कि जिले ने सरकारी निधि के साथ-साथ स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों और पंचायतों की सहभागिता पर जोर दिया। यही कारण है कि खंडवा ‘जन भागीदारी’ के इस राष्ट्रीय अभियान में सबसे आगे निकल सका।
जल संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता
इस तरह के राष्ट्रीय पुरस्कारों से जल संरक्षण के प्रति देशभर में जागरूकता बढ़ रही है। जल शक्ति मंत्रालय का यह अभियान न सिर्फ पानी बचाने की दिशा में प्रेरित करता है बल्कि देश के उन जिलों और समुदायों को प्रोत्साहित करता है जो सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार के साथ समाधान खोज रहे हैं।
खंडवा ने साबित कर दिया है कि जब प्रशासन और जनता साथ मिलकर काम करते हैं तो जल संकट जैसी गंभीर चुनौती का हल निकालना असंभव नहीं है।
आगे की राह
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद खंडवा प्रशासन ने कहा है कि वह आने वाले वर्षों में भी जल संरक्षण के मॉडल को और मजबूत करेगा और इसे स्थायी विकास के रूप में विकसित करेगा। जिला प्रशासन अन्य जिलों को भी अपने अनुभव और सफल मॉडल साझा करेगा ताकि भारत के अधिक क्षेत्र जल सुरक्षा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकें।
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