यूपी में SIR के बहाने साइबर क्रिमिनल्स सक्रिय, OTP शेयर करना पड़ सकता है भारी !

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि अगर एसआईआर प्रक्रिया में कोई वोटर से ओटीपी मांगता है तो वो फर्जी या संदिग्ध हो सकता है.

उत्तर प्रदेश में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान साइबर ठगी का खतरा बढ़ गया है। मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता के बीच जालसाज भी सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें लेकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। उन्होंने मतदाताओं से ओटीपी (OTP) ठगी से बेहद सावधान रहने की अपील की है। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाता से ओटीपी नहीं मांगते। इसलिए किसी भी फोन कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें जो एसआईआर के नाम पर ओटीपी मांगता हो।

यूपी में SIR के बहाने साइबर क्रिमिनल्स सक्रिय, OTP शेयर करना पड़ सकता है भारी !
यूपी में SIR के बहाने साइबर क्रिमिनल्स सक्रिय, OTP शेयर करना पड़ सकता है भारी !

मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी, लेकिन साथ में खतरा भी

उत्तर प्रदेश में इन दिनों एसआईआर की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने के लिए बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं, दस्तावेज अपडेट कर रहे हैं और गलतियों को सुधार रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सिर्फ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं, ओटीपी का किसी तरह का प्रयोग नहीं होता। लेकिन इसी सक्रियता का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को फोन कर या फर्जी मैसेज भेज कर धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी, लेकिन साथ में खतरा भी
मतदाता सूची पुनरीक्षण में तेजी, लेकिन साथ में खतरा भी

हाल के दिनों में कई जिलों में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ लोग बीएलओ या चुनाव आयोग का कर्मचारी बनकर कॉल कर रहे हैं और यह कहकर ओटीपी मांग रहे हैं कि मतदाता सूची में नाम अपडेट करने या सत्यापन के लिए यह आवश्यक है। इस तरह के कॉल पूरी तरह से फर्जी और धोखाधड़ी के प्रयास हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट रूप से कहा कि:

  • एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी चरण में ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती।
  • बीएलओ को ओटीपी मांगने का अधिकार नहीं है और न ही आयोग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी किया गया है।
  • अगर कोई व्यक्ति एसआईआर के नाम पर ओटीपी मांगता है तो वह साइबर अपराधी है।

उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि ऐसे किसी भी प्रयास की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या साइबर अपराध शाखा को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

कैसे हो रही है ठगी की कोशिश?

चुनाव आयोग के पास जो शिकायतें आई हैं, उनमें ठगी के तरीके लगभग एक जैसे हैं:

  1. कॉल कर कहा जाता है कि आपका वोटर आईडी अपडेट हो रहा है, ओटीपी बताइए।
  2. फर्जी लिंक भेजकर कहा जाता है कि उस पर क्लिक करके ओटीपी सबमिट करें।
  3. व्हाट्सऐप पर चुनाव आयोग का नकली लोगो लगाकर संदेश भेजे जाते हैं।

इन सभी तरीकों का उद्देश्य एक ही है—ओटीपी हासिल करके बैंकिंग फ्रॉड करना।

मतदाता कैसे रहें सतर्क?

चुनाव आयोग ने मतदाताओं से कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी बिल्कुल न दें।
  • फर्जी मैसेज या लिंक पर क्लिक न करें।
  • बीएलओ हमेशा पहचान पत्र के साथ आते हैं—पहचान की पुष्टि के बाद ही जानकारी दें।
  • अगर कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें।
  • चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से ही जानकारी सत्यापित करें।

प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें किसी डिजिटल ओटीपी वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। बीएलओ सिर्फ दस्तावेज देखते हैं, फॉर्म भरवाते हैं और मतदाताओं की जानकारी सत्यापित करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की ओटीपी मांगने की बात सिर्फ और सिर्फ ठगी का हिस्सा है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन करने का महत्वपूर्ण अभियान है। लेकिन इसके साथ साइबर अपराधियों की सक्रियता चिंता बढ़ा रही है। चुनाव आयोग की चेतावनी बेहद अहम है, क्योंकि एक छोटी लापरवाही भी बैंक खाते खाली होने जैसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर में ओटीपी की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए मतदाता जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

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