दिल्ली-NCR में पॉल्यूशन एक बार फिर डेंजर लेवल पर पहुंच गया है। राजधानी में प्रदूषण के गंभीर हालात को देखते हुए से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने वकीलों और वादियों को एक बड़ी राहत और सलाह दी है।
दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है और बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राजधानी में रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 461 दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे खराब स्तर माना जा रहा है। इससे एक दिन पहले शनिवार को AQI 432 रिकॉर्ड किया गया था। सोमवार को भी हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला और दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार बना हुआ है।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली की हवा लगातार “गंभीर” श्रेणी में बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहना स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरनाक है, जबकि बुजुर्गों, बच्चों और सांस या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बढ़ते प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक प्रदूषण और मौसम में ठंड के साथ हवा की रफ्तार कम होना इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके अलावा, आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं का असर भी राजधानी की हवा पर पड़ता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक तेज हवाएं नहीं चलतीं या बारिश नहीं होती, तब तक प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने दिल्ली की मौजूदा स्थिति पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी “गैस चैंबर” में तब्दील हो चुकी है और हालात बेहद खराब हैं। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण को न सिर्फ पर्यावरण, बल्कि स्वास्थ्य और न्यायिक प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा।
इन्हीं हालात को ध्यान में रखते हुए CJI सूर्यकांत ने वकीलों और वादियों को बड़ी राहत देते हुए एक अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खराब वायु गुणवत्ता के कारण लोगों को अदालत आने में परेशानी हो सकती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में ‘हाइब्रिड मोड’ के जरिए पेशी को प्राथमिकता दी जाए। यानी वकील चाहें तो ऑनलाइन माध्यम से भी सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। यह फैसला खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत भरा है, जिन्हें लंबी दूरी तय कर अदालत पहुंचना पड़ता है।
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम किसी सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जब हालात इतने खराब हों कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाए, तो अदालतों को भी संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख आने वाले दिनों में अन्य अदालतों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।
वहीं, दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों ने प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई सख्त कदम लागू किए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल वाहनों पर पाबंदी और उद्योगों पर निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं। हालांकि, आम लोगों का कहना है कि इन कदमों का जमीनी असर अभी नजर नहीं आ रहा है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-NCR इस वक्त एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से गुजर रहा है। बढ़ता AQI न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है, बल्कि प्रशासन और न्यायपालिका को भी विशेष कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में मौसम और सरकारी प्रयास मिलकर राजधानी को इस दमघोंटू हवा से कितनी राहत दिला पाते हैं।
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