गोरखुपर में हुई इस सुरक्षा चूक को लेकर अधिकारियों का कहना है कि इस घटना की प्रारंभिक जांच में नगर निगम पर्यवेक्षक अरविंद कुमार की लापरवाही पाई गई है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर दौरे के दौरान कथित तौर पर हुई सुरक्षा में चूक का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित नगर निगम पर्यवेक्षक को निलंबित कर दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। वहीं, इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए न सिर्फ मुख्यमंत्री की सुरक्षा बल्कि आम जनता की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार शाम की है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में गोरखनाथ ओवरब्रिज के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का काफिला निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पहुंचा और उनकी गाड़ी मंच के पास रुकी। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के मुताबिक, सबसे पहले भाजपा के स्थानीय सांसद रवि किशन कार से उतरे, इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे ही बाहर निकले, तभी अचानक एक गाय उनकी गाड़ी की ओर दौड़ती हुई पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के वाहन से उतरने के कुछ ही सेकंड के भीतर यह स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों में तत्काल सतर्कता बढ़ गई। सुरक्षाबलों ने तुरंत घेरा बनाकर मुख्यमंत्री को सुरक्षित रखा और गाय को वहां से हटाया। सौभाग्य से इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और न ही मुख्यमंत्री या किसी अन्य व्यक्ति को कोई नुकसान पहुंचा। इसके बावजूद, इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था में चूक के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल और उसके आसपास की जिम्मेदारी नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की होती है। जांच में यह सामने आया कि कार्यक्रम स्थल के आसपास आवारा पशुओं की आवाजाही को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। इसी लापरवाही को आधार बनाते हुए संबंधित नगर निगम पर्यवेक्षक को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य स्तर पर भी लापरवाही पाई जाती है, तो आगे और कार्रवाई हो सकती है।

इस घटना के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की चूक गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी खामी सामने आ सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। अखिलेश यादव ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताते हुए सरकार से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने की मांग की है।
हालांकि, सत्तापक्ष की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों की तत्परता के कारण कोई भी खतरा पैदा नहीं हुआ।
फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर जहां प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित किया है, वहीं विपक्ष इस घटना को सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के तौर पर देख रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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