दिल्ली प्रदूषण पर सियासी तकरार, AAP के मजाक पर BJP का तंज !

दिल्ली प्रदूषण पर सियासी तकरार, AAP के मजाक पर BJP का तंज !

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के हालिया बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा ऐतराज जताया है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर हास्य-व्यंग्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह सीधे तौर पर दिल्ली की जनता की पीड़ा का मजाक उड़ाने जैसा है।

दिल्ली प्रदूषण पर सियासी तकरार, AAP के मजाक पर BJP का तंज !
दिल्ली प्रदूषण पर सियासी तकरार, AAP के मजाक पर BJP का तंज !

AAP के बयान पर BJP का विरोध

वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सौरभ भारद्वाज द्वारा सुपरमैन, स्पाइडरमैन, बैटमैन और सैंटा क्लोज जैसे काल्पनिक किरदारों की “बेहोशी” का जिक्र कर प्रदूषण पर टिप्पणी करना बेहद असंवेदनशील है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली की जनता जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे समय में मजाकिया टिप्पणियां करना जनता के दर्द से खेलने के बराबर है।

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि प्रदूषण कोई हंसी-मजाक का विषय नहीं है। यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, जिसने दिल्ली को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल कर दिया है। ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं से गंभीरता और समाधान की अपेक्षा होती है, न कि तंज और व्यंग्य की।

केजरीवाल सरकार पर लापरवाही का आरोप

वीरेन्द्र सचदेवा ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आज दिल्लीवासी जिस प्रदूषण का दंश झेल रहे हैं, वह वर्षों की सरकारी लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए भी आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति नहीं बनाई।

केजरीवाल सरकार पर लापरवाही का आरोप
केजरीवाल सरकार पर लापरवाही का आरोप

सचदेवा के मुताबिक, हर साल सर्दियों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, लेकिन सरकार की तैयारी केवल अस्थायी कदमों तक सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि न तो वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया गया और न ही पराली, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए कोई ठोस योजना जमीन पर उतरी।

सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल

सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल
सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने सौरभ भारद्वाज के उस कार्यकाल को भी कटघरे में खड़ा किया, जब वे केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। सचदेवा ने आरोप लगाया कि उस दौरान भी दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में प्रदूषण से निपटने के लिए कोई ठोस और प्रभावी काम नहीं किया गया, जबकि इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उसी दौरान दिल्ली सरकार के अस्पतालों में नकली दवाएं बांटे जाने जैसे गंभीर मामले सामने आए, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। सचदेवा का कहना है कि सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय केवल विज्ञापन और प्रचार पर ध्यान केंद्रित किया।

मोहल्ला क्लीनिक पर भी उठाए सवाल

वीरेन्द्र सचदेवा ने आम आदमी पार्टी की बहुचर्चित योजना मोहल्ला क्लीनिक को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन मोहल्ला क्लीनिकों को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि बताती रही, वही बाद में घोटालों के केंद्र बनकर सामने आए। बीजेपी अध्यक्ष के मुताबिक, इन क्लीनिकों में सुविधाओं, दवाओं और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय केवल इमेज बिल्डिंग और प्रचार अभियान चलाए। नतीजा यह हुआ कि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल रही।

सियासी टकराव और जनता की चिंता

दिल्ली में प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच यह जुबानी जंग ऐसे समय में तेज हुई है, जब राजधानी की हवा लगातार खतरनाक श्रेणी में बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारों को राजनीति से ऊपर उठकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

सियासी टकराव और जनता की चिंता
सियासी टकराव और जनता की चिंता

फिलहाल, बीजेपी जहां आम आदमी पार्टी पर असंवेदनशीलता और लापरवाही का आरोप लगा रही है, वहीं AAP सरकार अपने बचाव में केंद्र और अन्य राज्यों की जिम्मेदारी गिनाती रही है। इस सियासी घमासान के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली की जनता को इस बार प्रदूषण से राहत मिल पाएगी या फिर यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा।

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