सपा की सरकार पर मायावती का तंज, अखिलेश पर सीधा प्रहार !

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 BSP चीफ मायावती ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए उन पर तीखा हमला किया है. मायावती के इस बयान के बाद यूपी में सियासी सरगर्मी बढ़ना तय है.

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा और विस्तृत हमला बोला है। सपा द्वारा कांशीराम जयंती मनाने के दावों के बीच आया यह बयान प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा करता नजर आ रहा है।

सपा की सरकार पर मायावती का तंज, अखिलेश पर सीधा प्रहार !
सपा की सरकार पर मायावती का तंज, अखिलेश पर सीधा प्रहार !

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा बयान जारी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और बीएसपी विरोधी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का बहुजन समाज में जन्मे महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के प्रति आदर-सम्मान का कोई इतिहास नहीं रहा, बल्कि अनादर और तिरस्कार का लंबा सिलसिला रहा है, जिसे मीडिया से लेकर सपा का तथाकथित पीडीए (PDA) वर्ग भी अच्छी तरह जानता है।

बीएसपी प्रमुख ने सपा द्वारा कांशीराम जयंती पर ‘पीडीए दिवस’ मनाने की घोषणा को राजनीतिक नाटकबाज़ी करार दिया। उन्होंने लिखा कि यह सब केवल उपेक्षित वर्गों के वोट हासिल करने के लिए दिखावा और छलावा है, जैसा कि अन्य विरोधी दल भी समय-समय पर करते रहे हैं। मायावती के अनुसार, सपा का यह व्यवहार बहुजन समाज के साथ विश्वासघात के समान है।

मायावती ने अपने बयान में 1993 के सपा-बीएसपी गठबंधन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार बनने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दलितों और कमजोर वर्गों पर होने वाले अत्याचार रोकने की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके चलते बीएसपी ने 1 जून 1995 को समर्थन वापस ले लिया और 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ, जिसमें उनके ऊपर जानलेवा हमला कराया गया। मायावती ने इसे सरकारी रिकॉर्ड और इतिहास में दर्ज “काली क्रूरता” बताया।

अखिलेश यादव का नाम लेते हुए मायावती ने कहा कि बहुजन नायक कांशीराम के सम्मान से जुड़े मामलों में भी सपा का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांशीराम के नाम पर बनाए गए जिलों और संस्थानों के नाम सपा सरकार बनते ही बदल दिए गए। कासगंज को कांशीराम नगर नाम से जिला बनाए जाने के बाद सपा सरकार द्वारा नाम बदलने को उन्होंने दलित समाज के साथ विश्वासघात बताया।

इसके अलावा उन्होंने संत रविदास नगर, कांशीराम के नाम पर प्रस्तावित उर्दू-फारसी-अरबी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के सरकारी अस्पताल सहित कई उदाहरण गिनाए, जहां सपा सरकारों पर नाम बदलने और बहुजन प्रतीकों को मिटाने का आरोप लगाया गया। मायावती ने सवाल किया कि क्या यही सपा का कांशीराम के प्रति सम्मान है?

मायावती ने सपा पर मुस्लिम विरोधी रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरह सपा सरकारों के दौरान भी कई घातक सांप्रदायिक दंगे हुए, जिनमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ और लाखों परिवार प्रभावित हुए। उनके अनुसार, सपा के भड़काऊ आचरण से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलता रहा और दोनों दल एक-दूसरे की जरूरत बनकर जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति करते रहे।

बीएसपी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि कांशीराम के निधन के बाद सपा सरकार ने एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित क्यों नहीं किया। उन्होंने बहुजन समाज से सपा के इतिहास को याद रखते हुए सतर्क रहने की अपील की।

मायावती के इस तीखे बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है। कांशीराम जयंती और पीडीए राजनीति के मुद्दे पर अब सपा और बीएसपी के बीच सियासी टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

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