पंचायतों के ‘एक्सटेंशन मॉडल’ से योगी सरकार बिछा रही 2027 की चुनावी बिसात।।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। त्रिस्तरीय पंचायतों के कार्यकाल में विस्तार (एक्सटेंशन मॉडल) और चुनाव टलने की चर्चाओं के बीच विपक्ष योगी सरकार पर 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर राजनीतिक रणनीति बनाने का आरोप लगा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण निर्धारण और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ता है या चुनाव आगे खिसकते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण राजनीति पर पड़ सकता है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर का नेटवर्क किसी भी दल के लिए विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने का अहम माध्यम माना जाता है।

विपक्ष का आरोप है कि भाजपा पंचायत चुनाव टालकर गांवों में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखना चाहती है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चुनावी माहौल तैयार किया जा सके। दूसरी ओर भाजपा और सरकार का पक्ष है कि यह फैसला पूरी तरह कानूनी और प्रशासनिक आवश्यकताओं के तहत लिया जा रहा है तथा इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।

दरअसल, पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए नए पिछड़ा वर्ग आयोग की प्रक्रिया और न्यायालय में चल रही सुनवाई को सरकार देरी की प्रमुख वजह बता रही है। सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न हो।

फिलहाल पंचायतों के ‘एक्सटेंशन मॉडल’ को लेकर अंतिम फैसला और चुनाव की तारीखों का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।