ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का आरोप: Google और Meta पर ED का शिकंजा कसता !

Google और Meta पर ED ने शिकंजा कसा है। इन दोनों कंपनियों पर ऑनलाइन बैटिंग ऐप्स को प्रमोट करने का आरोप है। ED ने दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेक दिग्गज कंपनियों Google और Meta (Facebook की मूल कंपनी) के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। दोनों कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने भारत में प्रतिबंधित ऑनलाइन बैटिंग (सट्टेबाजी) ऐप्स का प्रचार-प्रसार कर उन्हें भारी मात्रा में मुनाफा कमाने में मदद की। ईडी की जांच के अनुसार, इन कंपनियों ने न केवल इन अवैध ऐप्स को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देने की अनुमति दी, बल्कि इस प्रक्रिया में मोटा कमीशन भी प्राप्त किया।

ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का आरोप: Google और Meta पर ED का शिकंजा कसता !
ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा देने का आरोप: Google और Meta पर ED का शिकंजा कसता !

कैसे फंसीं टेक कंपनियां

ED को शुरुआती जानकारी उन ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई के दौरान मिली, जो भारत में गैरकानूनी रूप से काम कर रही थीं। इनमें कई ऐप्स चीन और दुबई से ऑपरेट हो रही थीं, लेकिन भारत में इनका प्रमोशन बड़े पैमाने पर YouTube, Google Ads और Facebook पर किया जा रहा था।

सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों ने सट्टेबाजी ऐप्स को लाखों यूजर्स तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। ईडी को शक है कि इस प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग भी हुई है। जांच एजेंसी ने कुछ बैंक खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल प्रमोशन से संबंधित दस्तावेज खंगालने के बाद Google और Meta को नोटिस जारी किया।

विज्ञापन के जरिए बढ़ा नेटवर्क

Google और Meta की एडवरटाइजिंग पॉलिसी में स्पष्ट उल्लेख है कि वे अवैध गतिविधियों से जुड़े विज्ञापनों को मंजूरी नहीं देते। लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि इन कंपनियों ने ऐसे कई बैटिंग ऐप्स को प्रॉमोट करने की अनुमति दी, जो भारतीय कानून के खिलाफ हैं। ये ऐप्स “गेमिंग” और “स्पोर्ट्स फैंटेसी” के नाम पर देशभर में युवाओं को आकर्षित कर रही थीं।

इनके विज्ञापन इतने आक्रामक और आकर्षक थे कि लाखों यूजर्स इन ऐप्स को डाउनलोड कर अपनी गाढ़ी कमाई सट्टेबाजी में झोंकने लगे। कहा जा रहा है कि इन कंपनियों ने इसके एवज में करोड़ों रुपये का राजस्व भी प्राप्त किया।

ईडी ने मांगी जानकारी

ईडी ने मांगी जानकारी
ईडी ने मांगी जानकारी

ED ने Google और Meta से पूछा है कि इन ऐप्स को प्रमोट करने की इजाज़त किस आधार पर दी गई? क्या इनके प्रमोटर्स का कोई वैधानिक सत्यापन किया गया था? क्या कंपनियों को इन ऐप्स की प्रकृति और इनके संचालन स्थल की जानकारी थी?

साथ ही, ईडी यह भी जानना चाहती है कि इन कंपनियों को इन विज्ञापनों से कितना रेवेन्यू प्राप्त हुआ और यह पैसा किन माध्यमों से उनके पास पहुंचा। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इन लेन-देन में विदेशी करेंसी का भी उपयोग किया गया, जो FEMA (Foreign Exchange Management Act) और PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के अंतर्गत जांच का विषय बनता है।

बड़ी कार्रवाई की संभावना

सूत्रों के अनुसार, अगर जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो ईडी इन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगा सकती है और उनके भारत में संचालन पर कुछ सीमाएं भी तय कर सकती है। इसके अलावा, कंपनी के लोकल प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

डिजिटल दुनिया में जवाबदेही पर बहस

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या टेक दिग्गज कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर हो रहे सभी प्रचारों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए? क्या एडवरटाइजिंग से होने वाले राजस्व के आगे नियमों की अनदेखी की जा सकती है?

जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले हफ्तों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, जिससे देश में ऑनलाइन विज्ञापन और डिजिटल कंटेंट की निगरानी को लेकर कड़े नियम बन सकते हैं।

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