हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ !

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में आज सुबह बड़ी घटना घटी है। यहां मची भगदड़ में 6 लोगों ने जान गंवाई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में शनिवार को एक भीषण भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और करीब 25 से 30 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक घटना उस समय घटी जब मंदिर परिसर में दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। प्रशासन और चश्मदीदों के अनुसार, एक अफवाह के चलते अचानक लोगों में अफरा-तफरी मच गई, जिससे यह भगदड़ हुई।

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ !
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ !

कैसे हुई घटना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 10:30 बजे हुई जब मंदिर परिसर में दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बताया जा रहा है कि किसी ने “करंट फैलने” की अफवाह फैला दी, जिसके बाद लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। मंदिर की सीढ़ियों और गलियारों में लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। संकरी जगह और भीड़ की अधिकता के कारण भगदड़ तेजी से फैल गई।

कैसे हुई घटना
कैसे हुई घटना

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

हरिद्वार के जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भगदड़ एक अफवाह के कारण हुई, जिसमें कहा गया कि मंदिर परिसर में करंट आ गया है। इससे घबराकर लोगों ने भागना शुरू कर दिया।”

उन्होंने बताया कि घायलों को तत्काल हरिद्वार जिला अस्पताल और नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है, जबकि घायलों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा।

भीड़ नियंत्रण में चूक?

यह मंदिर सावन माह के चलते विशेष रूप से भीड़-भाड़ वाला हो जाता है। शनिवार और सोमवार को यहां विशेष भीड़ उमड़ती है क्योंकि यह दिन देवी को समर्पित होते हैं। पुलिस और मंदिर प्रशासन पर यह सवाल उठने लगे हैं कि इतने बड़े आयोजन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार मंदिर में भीड़ का दबाव बढ़ रहा था, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम थी और इमरजेंसी निकास के पर्याप्त उपाय भी नहीं थे।

राज्य सरकार का बयान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर दुख जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “यह बहुत ही दर्दनाक हादसा है। मैं शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। राज्य सरकार घायलों का हरसंभव उपचार सुनिश्चित करेगी और घटना की गहराई से जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर नाराज़गी

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर प्रशासन की लापरवाही को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूज़र्स ने मंदिर परिसर में सुरक्षा मानकों की कमी और भीड़ नियंत्रण की असफलता पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है और घटना को ‘प्रशासनिक विफलता’ बताया है।

भविष्य की तैयारियों पर सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब धार्मिक स्थलों पर भीड़ के कारण ऐसी घटनाएं हुई हैं। इससे पहले भी कई मंदिरों और धार्मिक मेलों में ऐसी भगदड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन और सरकार ने इनसे कोई सबक लिया है? क्या हर बड़े धार्मिक आयोजन से पहले खतरे का पूर्वानुमान और उससे निपटने के उपाय किए जाते हैं?

निष्कर्ष

हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर में हुई यह घटना न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा सदमा है, बल्कि यह प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से लिया जाए। श्रद्धा और आस्था के ऐसे पावन स्थलों पर यदि सुरक्षा ही नहीं होगी तो यह हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे।

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