मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस बार सरकार ने 14 आईएएस और 50 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए सोमवार देर रात प्रशासनिक फेरबदल का बड़ा फैसला लिया। राज्य में एक झटके में 14 आईएएस और 50 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को होने वाले धार दौरे से पहले इस फेरबदल का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना और राजनीतिक समीकरणों को साधना है। इस फैसले से ब्यूरोक्रेसी और पुलिस महकमे में हलचल मच गई है।

इंदौर-उज्जैन पर विशेष फोकस
तबादलों में सबसे अहम बदलाव इंदौर और उज्जैन संभाग में देखने को मिला। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने विश्वस्त माने जाने वाले जनसंपर्क आयुक्त डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाड़े को इंदौर का नया कमिश्नर नियुक्त किया है। यह कदम इंदौर के प्रशासनिक ढांचे को मज़बूत करने और पीएम मोदी के दौरे की तैयारियों को देखते हुए उठाया गया है।
वहीं, इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को उज्जैन संभाग आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें सिंहस्थ मेले का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों की रूपरेखा को देखते हुए यह जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जा रही है।
राजधानी और अन्य जिलों में भी बदलाव
राजधानी भोपाल समेत कई बड़े जिलों में अधिकारियों के पत्ते बदले गए हैं। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक संभागों में नए कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक मशीनरी को चुस्त करना चाहती है।
पुलिस विभाग में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। कुल 50 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है। इनमें कई जिलों के एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
पीएम मोदी के दौरे से जुड़ा फेरबदल?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को होने वाले धार दौरे से पहले किया गया है। सरकार चाहती है कि इस दौरे के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक चूक या लापरवाही सामने न आए। खासकर, इंदौर और उज्जैन जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों को लेकर सरकार बेहद सतर्क है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी और चुनौतियाँ
- डॉ. सुदाम खाड़े – इंदौर कमिश्नर बनकर उन्हें शहर के विकास कार्यों, पीएम दौरे की तैयारियों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को गति देने की चुनौती होगी।
- आशीष सिंह – उज्जैन संभाग आयुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी का पदभार मिलना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है। सिंहस्थ 2028 के प्रारंभिक खाके और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना उनका मुख्य काम होगा।
- पुलिस महकमे में तबादलों के बाद कानून-व्यवस्था, नक्सल प्रभावित इलाकों और आगामी त्योहारों पर विशेष ध्यान देने की चुनौती नए अधिकारियों के सामने है।
राजनीतिक मायने
मोहन यादव सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और भाजपा सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह पूरी तरह सक्रिय है और प्रदेश की हर व्यवस्था पर पकड़ बनाए हुए है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर लापरवाही और अफसरशाही के आरोप लगाता रहा है, ऐसे में यह बड़ा फेरबदल सरकार की सख्ती और तत्परता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का यह बड़ा फेरबदल न केवल प्रशासनिक हलकों में सुर्खियां बटोर रहा है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। इंदौर और उज्जैन में किए गए बदलाव संकेत देते हैं कि सरकार सिंहस्थ की तैयारियों और पीएम मोदी के दौरे को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। अब देखना होगा कि नई तैनाती पाए अधिकारी इन चुनौतियों का किस तरह सामना करते हैं और जनता के हित में किस हद तक काम कर पाते हैं।
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