दिल्ली में दिवाली पर इस साल सिर्फ ग्रीन पटाखे चला सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर हामी भरी है और साथ ही कुछ नियम कायदे बताए हैं। जानिए आपको क्या करना है क्या नहीं?
इस दिवाली, दिल्ली-एनसीआर के लोग ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति पा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने इस संबंध में स्पष्ट कर दिया है कि यह छूट केवल ‘परीक्षण के आधार पर’ दी गई है। न्यायालय ने साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि पटाखों के उपयोग और बिक्री के लिए कड़े नियमों और दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।

दिवाली 2025: ग्रीन पटाखों वाली, SC ने जारी की पूरी गाइडलाइन !
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में इस वर्ष दिवाली के दौरान केवल ग्रीन पटाखों (पर्यावरण-अनुकूल पटाखे) की बिक्री और उपयोग किया जा सकेगा। ग्रीन पटाखों को नीरी (NIR) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अनुमोदित होना आवश्यक है और इन पर QR कोड होना अनिवार्य है।
यह कदम वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने कहा है कि यह कदम “परीक्षण के आधार पर” है, जिसका मतलब है कि इस वर्ष के अनुभव के आधार पर ही भविष्य में नीति तय की जाएगी।
पर्यावरण की निगरानी और गश्ती
सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी का आदेश दिया है कि ग्रीन पटाखों के नियमों का उल्लंघन न हो। दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों की गश्ती टीमें निर्धारित दिनों और समय में ही पटाखों के फोड़ने की अनुमति सुनिश्चित करेंगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सिर्फ अनुमोदित QR कोड वाले पटाखे ही फोड़े जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में क्लासिकल या अवैध पटाखों की बिक्री और उपयोग न हो, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
नियम और दिशानिर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के इस्तेमाल के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं:
- समय सीमा का पालन: ग्रीन पटाखे केवल सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक फोड़े जा सकते हैं।
- अनुमोदित पटाखे ही इस्तेमाल: केवल PESO और NIR द्वारा प्रमाणित QR कोड वाले पटाखे फोड़ने की अनुमति है।
- गश्ती और निगरानी: दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियां निर्धारित स्थानों और समय का निरीक्षण करेंगी।
- ध्वनि और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण: ग्रीन पटाखों की ध्वनि 75 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए और रासायनिक प्रदूषण न्यूनतम होना चाहिए।
- सामाजिक और पर्यावरण जागरूकता: जनता को यह सुनिश्चित करना होगा कि पटाखों का प्रयोग सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से हो।
ग्रीन पटाखों के फायदे

ग्रीन पटाखों को कम ध्वनि और कम रासायनिक प्रदूषण वाले पटाखों के रूप में विकसित किया गया है। इनके इस्तेमाल से:
- वायु प्रदूषण में कमी आती है।
- ध्वनि प्रदूषण न्यूनतम रहता है।
- सुरक्षा बढ़ती है क्योंकि ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं।
- स्वास्थ्य पर असर कम पड़ता है, खासकर बच्चों और वृद्धों के लिए।
सरकारी तैयारी और जागरूकता अभियान
दिल्ली सरकार और अन्य स्थानीय एजेंसियां दिवाली से पहले ग्रीन पटाखों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चला रही हैं। जनता को QR कोड वाले पटाखों की पहचान, समय और नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया है कि गश्ती टीमें शहर के प्रमुख बाजारों और residential areas में सक्रिय रहेंगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अवैध पटाखों की बिक्री और फोड़ने की घटनाओं पर नजर रखी जा सके।
भविष्य की दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष का अनुभव आगे की नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि ग्रीन पटाखों का प्रयोग सफल और नियंत्रित रहा, तो आने वाले वर्षों में भी इन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी।
निष्कर्ष
इस दिवाली, दिल्ली-एनसीआर के लोग पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन पटाखों का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सख्त नियमों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण कम करने के लिए है, बल्कि लोगों में जिम्मेदार और सुरक्षित पटाखा उत्सव मनाने की जागरूकता भी बढ़ाएगा।
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