योगी सरकार के मंत्री की मुश्किलें बढ़ीं, अवैध हथियार मामले ने पकड़ा तूल !

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 आजमगढ़ के अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ के  प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान राजभर ने युवाओं को ‘बिना लाइसेंस वाले हथियार’ थामने की बात कहकर नई बहस छेड़ दी है.

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आजमगढ़ जिले के अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान राजभर द्वारा युवाओं को लेकर दिए गए बयान ने नई बहस छेड़ दी है। खास तौर पर उनके ‘बिना लाइसेंस वाले हथियार’ वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई है।

योगी सरकार के मंत्री की मुश्किलें बढ़ीं, अवैध हथियार मामले ने पकड़ा तूल !
योगी सरकार के मंत्री की मुश्किलें बढ़ीं, अवैध हथियार मामले ने पकड़ा तूल !

कार्यक्रम के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज को मजबूत करने के लिए उन्हें तैयार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर वे ‘बिना लाइसेंस वाले हथियार’ भी थाम सकते हैं। इस बयान के सामने आते ही इसे लेकर तरह-तरह की व्याख्याएं होने लगीं। विपक्षी दलों ने इसे कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए सवाल उठाए, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

हालांकि, बाद में ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘बिना लाइसेंस वाले हथियार’ से उनका आशय किसी अवैध हथियार से नहीं, बल्कि सेवा, सुरक्षा और आत्मरक्षा की भावना से है। राजभर के अनुसार, उनका उद्देश्य युवाओं को हिंसा की ओर ले जाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार और जागरूक बनाना है।

राजभर ने ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संगठन वंचित, शोषित, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को सही दिशा और लक्ष्य देने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस मंच के जरिए युवाओं को शिक्षा, रोजगार और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया जाएगा। यदि कोई बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या सेना में जाना चाहता है, तो उसके लिए रिटायर्ड विशेषज्ञों और अनुभवी लोगों की मदद से प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन की जरूरत है। ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ का प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी सोच के तहत शुरू किया गया है, ताकि समाज के कमजोर वर्ग से आने वाले बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। राजभर ने जोर देकर कहा कि उनकी पहल का मकसद समाज में आत्मविश्वास और अनुशासन पैदा करना है।

योगी सरकार के मंत्री की मुश्किलें बढ़ीं, अवैध हथियार मामले ने पकड़ा तूल !
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इस कार्यक्रम के दौरान ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ के संक्षिप्त नाम RSS को लेकर भी सवाल उठे। जब उनसे इस नाम और भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच समानता पर सवाल किया गया, तो राजभर ने इस पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ का नाम महाराजा सुहेलदेव के नाम पर बहुत पहले से प्रचलित है और इसका उद्देश्य केवल समाज सेवा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका किसी अन्य संगठन से कोई संबंध नहीं है।

राजभर ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव पिछड़े और वंचित समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उन्हीं के नाम पर यह संगठन काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर नाम को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनके सामाजिक कार्यों को विवाद में घसीटा जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओमप्रकाश राजभर के बयान ऐसे समय में आए हैं, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति धीरे-धीरे 2027 विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उनके हर बयान को सियासी चश्मे से देखा जा रहा है। हालांकि राजभर खुद को साफगोई के लिए जाने जाने वाले नेता बताते हैं और अक्सर बेबाक बयान देते रहे हैं।

कुल मिलाकर, ‘राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना’ के प्रशिक्षण कार्यक्रम और ओमप्रकाश राजभर के बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और उसके मायने कितने अहम हो गए हैं। अब यह देखना होगा कि यह मामला आगे कितना तूल पकड़ता है और राजभर की सफाई से विवाद थमता है या फिर राजनीतिक बहस और तेज होती है।

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