गौतम अडानी की टीम अमेरिका में एक मुश्किल को सुलझाने की कोशिश कर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार अडानी की टीम ने डोनाल्ड ट्रंप के कुछ अधिकारियों से मुलाकात की है।
अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी को बहुत जल्द रिश्वतखोरी के एक मामले में ‘क्लीन चिट’ मिल सकती है. अमेरिका की एक अदालत में रिश्वत देने के केस का सामना कर रहे गौतम अडानी की टीम ने हाल में वहां की सरकार के साथ एक खास मुलाकात की है. इस मुलाकात में डोनाल्ड ट्रंप सरकार के अधिकारियों और गौतम अडानी की टीम के बीच इस मामले को लेकर लंबी बातचीत हुई है.
ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम अडानी की टीम ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर अडानी पर लगे क्रिमिनल चार्ज को हटाने की अपील की है. ये अपील रिश्वत के एक मामले में उनके खिलाफ चल रही जांच को लेकर की गई है.

क्या है अडानी का ‘रिश्वत देने वाला’ पूरा केस?
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ जांच में पाया कि भारतीय कंपनी (अडानी ग्रुप) को पावर सप्लाई के कॉन्ट्रैक्ट निश्चित तौर पर मिलें , इसके लिए दोनों की ओर से भारत में अधिकारियों को करोड़ों में रिश्वत दी गई. इन कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर अडानी ग्रुप ने अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह किया और पैसे जुटाए. इस मामले में अमेरिका के बाजार नियामक ने भी गौतम अडानी और सागर अडानी को समन किया था.
अडानी की ओर से दी गई है ये दलील

इस मुलाकात के दौरान गौतम अडानी की टीम ने ये बात रखने की कोशिश की है कि रिश्वत देने का ये मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रायोरिटी के साथ मैच नहीं होता है. ऐसे में इस मामले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
गौतम अडानी के रिश्वतखोरी के मामले में बातचीत इस साल की शुरुआत में शुरू हुई थी. लेकिन हाल के हफ्तों में इसने रफ्तार पकड़ी है. अगर इस मुद्दे पर इसी रफ्तार से बातचीत जारी रहती है, तो आने वाले कुछ महीनों में इस मामले पर बड़ा फैसला आ सकता है. गौतम अडानी को क्लीन चिट भी मिल सकती है.
जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालते ही इस केस में गौतम अडानी को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई थी. नवंबर 2024 में अमेरिकी जांच एजेंसियों ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ रिश्वत देने का ये मामला दर्ज किया था.
बाजार में बढ़ा भरोसा, लेकिन संकट अभी टला नहीं
हालांकि, शेयर बाजार में सुधार दिखा है और अडानी को ‘क्लीन चिट’ की उम्मीद बंधी है, लेकिन यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. न्याय विभाग और व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि यह केस उनके प्राथमिकता वाले एजेंडे से मेल नहीं खाता. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अडानी ग्रुप अमेरिकी जांच एजेंसियों से राहत पा सकेगा या यह मामला और उलझेगा.
265 मिलियन डॉलर रिश्वत देने का आरोप
अमेरिकी नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और छह अन्य लोगों ने भारत के राज्य सरकार के अधिकारियों को साल 2020 से 2024 के बीच लगभग ₹2200 करोड़ (265 मिलियन डॉलर) की रिश्वत दी. SEC का कहना है कि यह रकम प्रॉफिटेबल सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्ट जीतने के लिए दी गई, जिनसे अगले 20 सालों में कंपनी को ₹16,000 करोड़ (2 बिलियन डॉलर) का मुनाफा होने की उम्मीद थी.
सभी आरोपों को बेबुनियाद बता चुका है आडानी ग्रुप
अडानी ग्रुप इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर चुकी है. ग्रुप की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि ये आरोप ‘बेबुनियाद’ हैं और कंपनी टसभी कानूनी उपायों’ का सहारा लेगी.
अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप
अमेरिका के न्याय विभाग का कहना है कि कंपनी ने जब निवेश जुटाया, तब जानबूझकर चल रही घूसखोरी की जांच को छिपाया, जिससे अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन हुआ.
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